जयपुर।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों के अच्छी खबर। जिनकी विद्यार्थियों के परिवारों की सालाना आय डेढ लाख रुपए है, अब उन्हें भी उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आय की सीमा में 50 फीसदी तक बढोतरी की है। इस नई आय सीमा का लाभ छात्र-छात्राओं को वर्तमान शैक्षिक सत्र में ही मिल सकेगा। दरअसल, मंत्रालय ने ओबीसी वर्ग की उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति की नई गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन इसी सत्र से प्रभावी होंगी।
गाइडलाइन के संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को 15-20 दिन पहले ही निर्देश मिले हैं। उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन पत्र माह के अंत तक भरने शुरू हो जाएंगे। इस साल ओबीसी वर्ग के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
नई गाइडलाइन के अनुसार इस डेढ लाख आय सीमा में मकान किराए से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं ओबीसी वर्ग के लिए आने वाले कुल बजट में से 30 फीसदी बजट बालिकाओं के लिए व 5 फीसदी बजट नि:शक्तजनों के लिए खर्च किया जा सकेगा। साथ ही विद्यार्थियों से हर साल आय प्रमाण पत्र भी नहीं लिया जाएगा। एक से अधिक वर्ष के कोर्स में केवल दाखिले के समय ही आय प्रमाण पत्र लिया जाएगा। उसी प्रमाण पत्र से आगामी दो-तीन वर्षों (कोर्स पूरा होने तक) छात्रवृत्ति दी जाएगी।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों के अच्छी खबर। जिनकी विद्यार्थियों के परिवारों की सालाना आय डेढ लाख रुपए है, अब उन्हें भी उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आय की सीमा में 50 फीसदी तक बढोतरी की है। इस नई आय सीमा का लाभ छात्र-छात्राओं को वर्तमान शैक्षिक सत्र में ही मिल सकेगा। दरअसल, मंत्रालय ने ओबीसी वर्ग की उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति की नई गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन इसी सत्र से प्रभावी होंगी।
गाइडलाइन के संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को 15-20 दिन पहले ही निर्देश मिले हैं। उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन पत्र माह के अंत तक भरने शुरू हो जाएंगे। इस साल ओबीसी वर्ग के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
नई गाइडलाइन के अनुसार इस डेढ लाख आय सीमा में मकान किराए से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं ओबीसी वर्ग के लिए आने वाले कुल बजट में से 30 फीसदी बजट बालिकाओं के लिए व 5 फीसदी बजट नि:शक्तजनों के लिए खर्च किया जा सकेगा। साथ ही विद्यार्थियों से हर साल आय प्रमाण पत्र भी नहीं लिया जाएगा। एक से अधिक वर्ष के कोर्स में केवल दाखिले के समय ही आय प्रमाण पत्र लिया जाएगा। उसी प्रमाण पत्र से आगामी दो-तीन वर्षों (कोर्स पूरा होने तक) छात्रवृत्ति दी जाएगी।
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