Friday, 19 October 2018

विडंबना / सरकारी स्कूलों में अभी भी नहीं मनाया जा रहा ‘आनंदवार’ दूसरे व चौथे शनिवार को बच्चों को बिना बैग स्कूल बुलाने की थी याेजना इस योजना के तहत बच्चों में पढ़ाई के साथ शौक को भी बढ़ाने की थी मंशा

जोधपुर।

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए माह के दूसरे और चौथे शनिवार को “आनंदवार’ मनाने की योजना फलीभूत नहीं हो पाई। इसके तहत बच्चों को इन दिनों में बिना बस्ते स्कूल आना था, ताकि उनकी क्रिएटिविटी को बढ़ाया जा सके। राजस्थान सरकार की मंशा तो यह थी कि बच्चों को पढ़ाई बोझ न लगे अौर उन्हें अपनी प्रतिभा को बाहर लाने मौका मिले लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों की उदासीनता और स्कूल मैनेजमेंट की लापरवाही से यह योजना लागू ही नहीं हो सकी।
माह के दूसरे और चौथे शनिवार को भी बच्चों को रोजाना की तरह बैग ले जाना पड़ रहा है। स्कूलों में ना तो क्रिएटिविटी की बात हो रही है और न ही उनकी प्रतिभा को पहचानने की कोशिश की जा रही है। हैरानी की बात तो यह है कि स्कूलों में बरती जा रही उदासीनता पर अफसर भी मौन हैं। शिक्षा विभाग ने यह जानने की कोशिश तक नहीं की कि स्कूलों में आनंदवार मनाया भी जा रहा है या नहीं। इस बारे में जब जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार जोशी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, यह सरकारी आदेश है कि हर स्कूल में दूसरे व चौथे शनिवार को आनंदवार मनाया चाहिए। अगर स्कूलों में कोताही बरती जा रही है जो हम जांच करवा देंगे। आगामी बैठक में सभी स्कूलों से इस बारे में रिपोर्ट भी लेंगे कि वहां अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है। 
शनिवार को आनंदवार करने के पीछे ध्येय था कि बच्चे पढ़ाई के साथ वाद-विवाद, कहानी सुनाना, कविता पाठ, पहेली सुलझाना, डांस, पेंटिंग, डांसिंग जैसी कई तरह की एक्टिविटीज में शामिल हों। इसके अलावा पौधरोपण, स्वच्छता और समाजसेवा सरीखे गुण भी बच्चों में पैदा करने की मंशा थी। इसके तहत कक्षा पहली से 5वीं, कक्षा 6 से 8वीं और 9 वीं से 12वीं के अलग-अलग ग्रुप बनाने थे, लेकिन कई स्कूलों में एेसे ग्रुप ही नहीं बने। हर ग्रुप में एक-एक प्रभारी और सह प्रभारी की नियुक्ति भी कागजों में की गई।

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